रोज की तरह मदमस्त दिखा बनारस, काशी नगरी में नहीं हुआ भारत बंद का असर
वाराणसी: दो अप्रैल को दलित संगठनों के भारत बंद के दौरान हुई हिंसा के विरोध में मंगलवार को सवर्ण संगठनों के भारत बंद के आह्वान का जिले में मिला-जुला असर रहा। विभिन्न संगठनों ने अलग-अलग जुलूस निकाले। डीएम कार्यालय और जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन कर आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग उठाई। इस दौरान लंका में युवा संगठनों ने दुकानें बंद कराईं और बीएचयू गेट से रवींद्रपुरी स्थित प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय तक जुलूस निकालकर जातिगत आरक्षण व्यवस्था का विरोध किया।
हालांकि पिछली बार की घटनाओं से सबक लेते हुए पुलिस-प्रशासन इस बार खासा मुस्तैद नजर आया। कहीं कोई अव्यवस्था और अशांति नहीं होने पाई। लंका में बंद दुकानें भी कुछ देर बाद खुल गईं। अलबत्ता, आंदोलन के चलते ट्रेनों की लेटलतीफी ने मुश्किलें बढ़ाई और इससे यात्रियों को काफी परेशानी हुई।
अधिवक्ताओ ने भी किया समर्थन
भारत बंद के समर्थन में डीएम कार्यालय के पास में धरना देकर अधिवक्ताओं ने कहा कि एससी-एसटी एक्ट के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया है उसका हर किसी को सम्मान करना चाहिए। फैसले को जाने-समझे बिना उसके विरोध में किया गया प्रदर्शन न्यायालय की अवमानना है साथ ही हिंसक प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई होनी चाहिए। धरने में विनोद पांडेय, धीरेंद्र श्रीवास्तव, राजीव सिंह, सुनील सिंह, माधव पांडेय, सुशील श्रीवास्तव, राजेश तिवारी, बिजेंद्र सिंह, मुकेश मिश्र, अर्पित पांडेय, संतोष सिंह, अमित सिंह, ओमप्रकाश दूबे, हनुमंत सिंह, एसएन सिंह आदि शामिल थे।
गरीब तबके को मिले आरक्षण का लाभ
अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा ने भारत बंद के समर्थन में जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। सरकार से मांग की कि जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था समाप्त की जाए। गरीब तबके को आरक्षण लाभ मिले, इसके लिए जरूरी है कि आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू किया जाए। इस बारे में सरकार के नाम संबोधित ज्ञापन की प्रति भेजी गई।